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विद्युत शक्ति विद्युत आवेश क्या है electric power charge in hindi

विद्युत शक्ति विद्युत आवेश क्या है (electric power charge in hindi)
हेलो दोस्तों आपको मैंने इस लेख विद्युत से संबंधित मुख्य टॉपिक विद्युत शक्ति व आवेश के बारे जानकारी लेकर आया हूं आपको बताएंगे ये क्या है किसे कहते हैं इसी इन्हीं की परिभाषा भी शामिल है।
विद्युत शक्ति विद्युत आवेश क्या है electric power charge in hindi

विद्युत शक्ति क्या है किसे कहते हैं (what is electric power in hindi)
किसी विद्युत के परिपथ में जिस दर से विद्युत ऊर्जा स्थानान्तरित होती हैं, उसे विद्युत शक्ति कहते हैं. यानी Electric power कहते हैं. इसकी S.I. इकाई मात्रक वाट (W) है।

किसी परिपथ के दो नोडों के बीच विभव में अंतर v(t) हो एवं इस शाखा में धारा i(t) हो, तो उस शाखा द्वारा ली जाने वाली विद्युतशक्ति हैं:
p(t)=v(t). i(t)}
विद्युत आवेश क्या है किसे कहते हैं (electrical charge in hindi)
प्रसिद्ध वैज्ञानिक थेल्स (thales) ने बताया की जब काँच की छड़ को रेशम के कपडे से रगड़ा जाता है, तो कांच की छड़ रगड़न के बाद छोटे छोटे कणों, कागज़ के टुकड़े आदि को चिपकाना प्रारम्भ कर देता है, घर्षण प्रक्रिया या रगड़ने के बाद पदार्थ साधारण से थोड़ा अलग व्यवहार प्रदर्शित करता है। और पदार्थ के इस विशेष गुण को उन्होंने विधुत आवेश के नाम दिया।

पदार्थ द्वारा आवेश (विशेष गुण) ग्रहण करने के बाद पदार्थ को आवेशित पदार्थ कहते हैं।
विद्युत आवेश कुछ उपपरमाणवीय कणों में एक मूल गुण है, जो विद्युतचुम्बकत्व का महत्व है। आवेशित पदार्थ को विद्युत क्षेत्र का असर पड़ता है और वह ख़ुद एक विद्युत क्षेत्र का स्रोत हो सकता है।

द्रव्य के साथ जुड़ी हुई वह अदिश भौतिक राशि है जिसके कारण चुम्बकीय और वैद्युत प्रभाव उत्पन्न होते है, आवेश कहलाती है। किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों को अधिकता या कमी से आवेश की अभि-धारणा प्राप्त होती है। ऋण आवेशित वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता और धन आवेशित वस्तु में इलेक्ट्रॉनो की कमी होती है।

विद्युत शक्ति, विद्युत आवेश क्या है या इस किसे कहते हैं (what is electric power electrical charge in hindi) से संबंधित यह लेख आपको कैसा लगा हमें कमेंट करके अवश्य बताए और अन्य जानकारी के लिए अन्य लेख देखें या मुख्य पृष्ठ पर जाएं।
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चुंबकीय क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं What is magnetic field in hindi

चुंबकीय क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं What is magnetic field in hindi
आज के इस लेख में चुंबकीय क्षेत्र क्या है? किसे कहते हैं यानी what is magnetic field in hindi से संबंधित जानकारी लेकर आया हूं, बताएगा इसकी परिभाषा व किस्से प्रदर्शित करते है।
चुंबकीय क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं What is magnetic field in hindi

चुंबकीय क्षेत्र क्या है: What is magnetic field in hindi
चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत धाराओं एवं चुंबकीय सामग्री का चुंबकीय प्रभाव है। किसी भी बिन्दु पर चुंबकीय क्षेत्र यानी magnetic field दोनों, दिशा और परिमाण द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। 

यह एक सदिश क्षेत्र है। 

चुम्बकीय क्षेत्र गतिमान विद्युत आवेश एवं मूलकणों के अंतर्भूत चुंबकीय आघूर्ण से निर्मित होता है।

चुम्बकीय क्षेत्र शब्द का प्रयोग दो क्षेत्रों के लिये किया जाता है, जिनका आपस में निकट सम्बन्ध है, लेकिन दोनों अलग अलग हैं। 
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इन दो क्षेत्रों को B तथा H, द्वारा निरूपित किया जाता है। 

H की ईकाई अम्पीयर प्रति मीटर (संकेत: A·m−1 or A/m) है एवं B की ईकाई टेस्ला (प्रतीक: T) है।

चुम्बकीय क्षेत्र (magnetic field) दो प्रकार से उत्पन्न कर सकते है- 
1] गतिमान आवेशों के द्वारा (यानी विद्युत धारा के द्वारा) 
2] मूलभूत कणों में निहित चुम्बकीय आघूर्ण के द्वारा विशिष्ट आपेक्षिकता में, विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र, एक ही वस्तु के दो पक्ष हैं, जो एक दूसरे से संबंधित होते हैं।

चुम्बकीय क्षेत्र हमें दो रूपों दिखाई देता है:
1] स्थायी चुम्बकों द्वारा लोहा, कोबाल्ट इत्यादि से निर्मित वस्तुओं पर लगने वाला बल 

2] मोटर आदि में उत्पन्न बलाघूर्ण जिससे मोटर घूमती है। आधुनिक प्रौद्योगिकी में चुम्बकीय क्षेत्रों का बहुतायत में उपयोग होता है। (वैद्युत इंजीनियरी और विद्युतचुम्बकत्व में)। 

धरती का चुम्बकीय क्षेत्र, चुम्बकीय सुई के माध्यम से दिशा ज्ञान कराने में उपयुक्त होती है।

विद्युत मोटर एवं विद्युत जनित्र में चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग होता है।
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विद्युत क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं what is electric field in hindi

विद्युत क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं - what is electric field in hindi
विद्युत क्षेत्र क्या है किसे कहते हैं what is electric field in hindi

आज के इस लेख में विद्युत क्षेत्र क्या है? किसे कहते हैं यानी what is electric field in hindi से संबंधित जानकारी लेकर आया हूं, बताएगा इसकी परिभाषा व किस्से प्रदर्शित करते है।

विद्युत क्षेत्र क्या है (what is electric field in hindi)

विद्युत् क्षेत्र (electric field), यदि किसी स्थान पर स्थित किसी स्थिर आवेशित कण पर बल लगता है उस स्थान पर यह है। विद्युत क्षेत्र (electric field) आवेशित कणों के द्वारा उत्पन्न होता है।अथवा समय के साथ परिवर्तित हो रहे चुम्बकीय क्षेत्र के कारण होता हैं। 

विद्युत क्षेत्र का कांसेप्ट सबसे पहले माइकल फैराडे ने दिया था।
विद्युत क्षेत्र (electric field) एक सदिश (vector) राशि है।

इसकी S.I. इकाई वोल्ट प्रति मीटर है।
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ताप विद्युत क्या है किसे कहते हैं what is thermoelectricity in hindi

तापविद्युत क्या है किसे कहते हैं what is thermoelectricity in hindi
तापविद्युत क्या है किसे कहते हैं what is thermoelectricity in hindi

आज के इस लेख में ताप विद्युत क्या है? किसे कहते हैं यानी what is thermoelectricity in hindi से संबंधित जानकारी लेकर आया हूं, बताएगा इसकी परिभाषा व किस्से प्रदर्शित करते है।
तापविद्युत क्या है - what is thermoelectricity in hindi
वह विद्युत, जो दो असमान धातुओं के तारों की संधि को गर्म करने पर इन तारों के परिपथ में प्रवाहित होने लगती है तापविद्युत (thermoelectricity) कहते हैं।

 इस तथ्य को सर्वप्रथम सीबेक ने सन् 1821 में ताँबे और बिस्मथ के तारों की संधि को गर्म करके इसका आविष्कार किया था। उपर्युक्त परिपथ में उत्पन्न विद्युत वाहक बल न्यून होता है।
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तापविद्युत की तीव्रता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है:
1] परिपथ के तारों की धातु की प्रकृति पर,
2] असमान धातुओं के तारों की दोनों संधियों के तापांतर पर,
3] इन संधियों के औसत ताप पर।

विद्युत वाहक बल को मापने के लिये असमान धातुओं के तारों के ठंढे सिरे विभवमापी से जोड़ दिए जाते हैं। यदि परिपथ में किसी दूसरी धातु का तार श्रेणी क्रम में कर दिया जाए तो ताप विद्युत् प्रभावों में परिवर्तन नहीं होता। यदि सीबेक विद्युत वाहक बल का परिमाण (E) तथा ठंढी संधि का तापांतर (T) एवं यदि एक संधि का ताप शून्य डिग्री सेल्सियस हो. 

तो E व T का संबंध निम्नलिखित सूत्र में ज्ञात किया जाता है:
E = AT + BT2

जहाँ A व B तापविद्युत् स्थिरांक हैं, तथा इनका मान परिपथ के तारों की धातु पर निर्भर करता है।
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मात्रक व व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं क्या है Unit and Derived unit in hindi

मात्रक व व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं क्या है Unit and Derived unit in hindi
मात्रक व व्युत्पन्न मात्रक से रिलेटेड यह आर्टिकल आपके लिए लेख आए गई आपको बताया जाएगा कि ये क्या है? किसे कहते हैं? एवं अन्य प्रकार भी सूचना प्रदान की जाएगी एवं इनकी की परिभाषा भी सम्मिलित हैं।
मात्रक व व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं क्या है Unit and Derived unit in hindi

मात्रक किसे कहते हैं क्या है (what is unit in hindi)
किसी वस्तु या पिण्ड के मानक मापन की इकाई को मात्रक कहते हैं।

मापन के सन्दर्भ में मात्रक किसी भौतिक राशि की एक निश्चित मात्रा को कहते हैं, जो कि नियम द्वारा परिभाषित एवं स्वीकृत की गई हो एवं जो उस भौतिक-राशि के मापन के लिए मानक के रूप में उपयोग होती हो। उस भौतिक राशि की कोई भी अन्य मात्रा इस इकाई के एक गुणक के रूप में व्यक्त की जाती है। 
उदाहरण के लिए लम्बाई एक भौतिक राशि है। मीटर लम्बाई का मात्रक है। जो एक निश्चित पूर्व-निर्धारित दूरी के बराबर होता है। 

प्राचीन काल से ही मात्रकों की परिभाषा करना, उन पर सहमति करना, उनका व्यावहारिक उपयोग करना इत्यादि की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न स्थानों एवं कालों में मात्रकों की विभिन्न प्रणालियाँ होना एक सामान्य बात थी। लेकिन अब एक वैश्विक मानक प्रणाली अस्तित्व में है, जिसे अन्तरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (International System of Units [S.I.]) कहते हैं।

विभिन्‍न सत मूल राशियां और दो पूरक राशियां कुछ नीचे दी गई है उनके मात्रक भी दिए गए हैं।

मूल राशियाँ     = मात्रक = संकेत
लंबाई              =मीटर         =m
द्रव्‍यमान          =किलोग्राम =kg
समय              =सेकण्‍ड     =s
ताप                =केल्विन     =k
विद्युत धारा      =ऐम्पीयर    =A
ज्‍योति तीव्रता   =कैण्‍डेला   =cd
पदार्थ की मात्रा  =मोल    =mol

पूरक राशियाँ
समतल कोण   =रेडियन   =rad
घन कोण         =स्‍टेरेडियन =sr

व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं क्या है (what is derived unit in hindi)
एक या एक से अधिक मूल मात्रकों पर उपयुक्त घातें लगाकर प्राप्त किए गए मात्रकों को हम व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं। यानी व्युत्पन्न मात्रक मूल मात्रकों पर निर्भर करते हैं। 
अन्य परिभाषा:
वे मात्रक, जो मूल मात्रकों की सहायता से ज्ञात लिए जाते हैं व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं।
कुछ व्युत्पन्न मात्रक निम्नलिखित हैं—
उदाहरण: आयतन, क्षेत्रफल, चाल
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सौर सेल किसे कहते हैं क्या है Solar cell in hindi

सौर सेल किसे कहते हैं क्या है - Solar cell in hindi
सौर सेल किसे कहते हैं क्या है Solar cell in hindi
सौर सेल किसे कहते हैं क्या है 

आज के इस लेख में हमने मुख्य रूप से सौर सेल किसे कहते हैं? क्या है? यानी Solar cell in hindi से संबंधित सभी जानकारी को आपके समक्ष लेख में लेकर आए हैं जो की बहुत ही अच्छी एवं सरलता से सभी प्रकार की सूचना को समाहित किया हुआ हैं।

सौर सेल किसे कहते हैं. क्या है समझते हैं?
सौर सेल जिसे सौर बैटरी भी कहा जाता है  यह फोटो-वोल्टाइक प्रभाव से सूर्य अथवा अन्य प्रकाश के किसी स्रोत से ऊर्जा हो अपने में समाहित करता है। अधिकतर उपकरणों के साथ इस सेल या बैटरी को इस प्रकार लगाया जाता है, कि वह लगाए जाने के बाद उपकरण का एक हिस्सा ही होती है एवं उससे अलग नहीं की जा सकता है। सूर्य की रोशनी से एक अथवा दो घंटे में यह चार्ज हो जाती है। सौर बैटरी में लगे सेल प्रकाश को समाहित कर अर्धचालकों के इलेक्ट्रॉन को उस धातु के साथ क्रिया करने को प्रेरित करता है। 

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एक बार यह क्रिया होने के बाद इलेक्ट्रॉन में उपस्थित ऊर्जा को या तो बैटरी में भंडार हो जाती है या फिर सीधे प्रयोग में आती है। ऊर्जा के भंडारण होने के बाद सौर बैटरी अपने निश्चित समय पर चार्ज खो देती है यानी यह डिस्चार्ज होती है। ये उपकरण में लगे हुए स्वचालित तरीके से दोबारा चालू होती है, या फिर उसे कोई व्यक्ति उस दोबारा चालू करता है।

तो आपने जो यह लेख सौर सेल किसे कहते हैं। क्या है। Solar cell in hindi से संबंधित लेख के बारे में एक अच्छा से कमेंट करे एवं अपने दोस्तों को शेयर करें।

विद्युत मोटर व विद्युत जनित्र क्या है किसे कहते हैं का सिद्धांत कार्यविधि लिखिए बताइए electric motor and generator in hindi

आज का यह लेख मुख्य रूप से विद्युत मोटर (electric motor) एवं विद्युत जनित्र (electric generator) से संबंधित है जिसे इनके बारे में बताया कि ये क्या है किसे कहते हैं एवं इनके सिद्धांत के साथ साथ कार्यविधि भी लिखी है। इंग्लिश में (Write the principle procedure of what is called electric motor and electric generator in hindi)

विद्युत मोटर क्या है किसे कहते हैं what is electric motor in hindi

यह एक विद्युतयांत्रिक मशीन है, जो कि विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। यानिकि इसे उपयुक्त विद्युत-स्रोत से जोड़ने पर यह घूर्णन करने लगती हैं, जिससे इससे कनेक्टेड सभी मशीन अथवा तंत्र भी साथ साथ घूर्णन करने लगते है। यानी यह विद्युत जनित्र का उल्टा काम करती है, जो यांत्रिक ऊर्जा लेकर विद्युत ऊर्जा पैदा करता है। कुछ मोटरें भिन्न भिन्न परिस्थितियों में मोटर अथवा जनित्र दोनो की तरह भी काम कर सकती हैं।

1] यह विद्युत् ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिणत करने के साधन हैं। 
2] यह औद्योगिक प्रगति का महत्वपूर्ण सूचक है। 
3] यह एक बड़ी सरल तथा बड़ी उपयोगी मशीन है। 
4] उद्योगों में शायद ही कोई ऐसा प्रयोजन हो जिसके लिए उपयुक्त इसका चयन न किया जा सके।


विद्युत जनित्र क्या है किसे कहते हैं what is electric generator in hindi
यह एक ऐसी युक्ति है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के काम आती है। इसके लिये यह सामान्यतः माईकल फैराडे के विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त का प्रयोग करती है। विद्युत मोटर, इसके विपरीत विद्युत-ऊर्जा को यांत्रिक उर्जा में बदलने का कार्य करती है। विद्युत-मोटर एवं विद्युत-जनित्र में बहुत कुछ समान होता है एवं कई बार एक ही मशीन बिना किसी बदलाव के दोनों की तरह कार्य कर सकती है।

1] विद्युत जनित्र, विद्युत आवेश को एक वाह्य परिपथ से होकर प्रवाहित होने के लिये वाध्य करता है। किन्तु यह आवेश का सृजन नहीं करता। 
2] यह जल-पम्प की तरह है, जो केवल जल को प्रवाहित करने का कार्य करती है, जल पैदा नहीं करती।
3] विद्युत जनित्र द्वारा विद्युत उत्पादन के लिये आवश्यक है कि जनित्र के रोटर को किसी बाहरी शक्ति-स्रित की सहायता से घुमाया जाय। 
4] इसके लिये प्रत्यागामी इंजन, टर्बाइन, वाष्प-इंजन, किसी टर्बाइन या जल-चक्र पर गिरते हुए जल, किसी अन्तर्दहन इंजन, पवन टर्बाइन या आदमी अथवा जानवर की शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।
5] किसी भी स्रोत से की गई यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करना संभव है। 
6]यह ऊर्जा, जलप्रपात के गिरते हुए पानी से अथवा कोयला जलाकर उत्पन्न की गई ऊष्मा द्वारा भाप से, अथवा किसी पेट्रोल अथवा डीज़ल इंजन से प्राप्त की जा सकती है। 
7] ऊर्जा के नए-नए स्रोत उपयोग में लाए जा रहे हैं। सामान्यतः पिछले कुछ वर्षों में परमाणुशक्ति का प्रयोग भी विद्युतशक्ति के लिए बड़े पैमाने पर किया गया है.
8] बहुत से देशों में परमाणुशक्ति द्वारा संचालित बिजलीघर बनाए गए हैं। 
9] ज्वार भाटों एवं ज्वालामुखियों में निहित असीम ऊर्जा का उपयोग भी विद्युत्शक्ति के जनन के लिए किया गया है। 
10] विद्युत उत्पादन के लिए इन सब शक्ति साधनों का उपयोग, विशालकाय विद्युत् जनित्रों द्वारा ही हाता है, जो सामान्यतः फैराडे के चुंबकीय क्षेत्र में घूमते हुए चालक पर वेल्टता प्रेरण सिद्धांत पर कार्य करता है।
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सभी प्रकार की सूचना को विकिपीडिया जैसी बड़ी वेबसाइट के माध्यम से ज्यादा जानकारी देखी जा सकती है इस लिख में भी कुछ पार्ट लिया गया है। यह लेख से संबंधित कोई जानकारी के लिए हमें कमेंट व इस लेख को शेयर करे। 

प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है किसे कहते हैं What is photoelectric effect in hindi

प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है किसे कहते हैं What is photoelectric effect in hindi
prakash vidyut prabhav kya hai

आज का यह लेख मुख्य रूप से प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) से संबंधित लेकर आया हूं जिसमें बताया जाएगा कि क्या है किसे कहते हैं। और इसके सूत्र परिभाषा व अन्य सूचना को आपको दिया जाता है।
प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है किसे कहते हैं What is photoelectric effect in hindi

प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है/ What is photoelectric effect in hindi

जब कोई भी पदार्थ (धातु या अधातु ठोस, द्रव या गैसें) किसी विद्युतचुम्बकीय विकिरण (जैसे एक्स-रे, दृष्य प्रकाश इत्यादि) से ऊर्जा शोषित करने के पश्चात इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करता है या इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन करता हैं तो प्रकाश के इस प्रभाव को प्रकाश विद्युत प्रभाव यानी Photoelectric Effect कहते हैं। 

प्रकाश विद्युत प्रभाव की क्रिया में जो इलेक्ट्रॉन निकलते हैं उन्हें प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (photoelectrons) कहते हैं।

1887 मे एच. हर्ट्स ने यह प्रयोग किया। इसमे कुछ धातुओ (जैसे-पोटैशियम, सीज़ियम, रूबीडियम इत्यादि) की सतह पर उपयुक्त आवृति वाला प्रकाश डालने पर उसमे से इलेक्ट्रॉन निष्काषित होते हैं। इस परिघटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते है। 
इस प्रयोग से प्राप्त परिणाम निम्न प्रकार:-
1] धातु की सतह से प्रकाशपुंज टकराते ही इलेक्ट्रॉन निष्काषित हो जाता है। अर्थात् प्रकाश पड़ने और इलेक्ट्रॉन निकलने मे कोई समय अंतराल नहीं होता है ।

2] निष्काषित इलेक्ट्रोनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता के समानुपाती होती है ।

3] प्रत्येक धातु के लिए एक अभिलक्षणिक न्यूनतम आवृति होती है। जिसे देहली आवृति कहते है। 

देहली आवृति से कम आवृति पर प्रकाश विध्युत प्रभाव प्रदर्शित नही होता है। 
f ≥ fο आवृति पर निष्काषित इलेक्ट्रोनो की कुछ गतिज ऊर्जा होती है। 
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गतिज ऊर्जा प्रयुक्त प्रकाश की आवृति के बढ़ने के साथ बढ़ती है।

निष्काषित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा निम्न समीकरण से दी जाती है:-
 hf=hf0+½MVm²

इसको निम्नलिखित प्रकार से भी लिखा जा सकता है:-
hf=Φ+Ek

जहाँ 
h= प्लैंक नियतांक है, 
f0= देहली आवृत्ति है (फोटॉन की न्यूनतम आवृत्ति जो प्रकाश-इलेक्टान निकालने में सक्षम है), 
Φ= कार्य फलन (वर्क फंक्शन = पदार्थ के अन्दर से फर्मी लेवेल वाले इलेक्त्रानों को बाहर निकालने के लिये आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा) है
Ek= प्रयोग में प्राप्त इलेक्ट्रानों की अधिकतम ऊर्जा है।
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विद्युत फ्लक्स क्या है किसे कहते हैं what is electric flux in hindi

विद्युत फ्लक्स क्या है किसे कहते हैं -what is electric flux in hindi
विद्युत फ्लक्स क्या है किसे कहते हैं what is electric flux in hindi
आज के इस लेख में विद्युत अभिवाह या विद्युत फ्लक्स क्या है? किसे कहते हैं यानी what is electric flux in hindi से संबंधित जानकारी लेकर आया हूं, बताएगा इसकी परिभाषा व किस्से प्रदर्शित करते है।
विद्युत फ्लक्स क्या है (what is electric flux in hindi)
विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी तल से अभिलम्बवत गुजरने वाली विद्युत बल रेखाओं की कुल संख्या (Total number) को विद्युत अभिवाह या विद्युत फ्लक्स या Electric Flux कहते हैं।

विद्युत फ्लक्स Φ से प्रदशित करते हैं।
Φ= E A cosθ

इसे फाई से लिखा जाता है।
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विद्युत धारा क्या है What is electricity and electric current in hindi.

विद्युत धारा क्या है What Is Electricity And Electric Current In Hindi.
विद्युत आवेश के प्रवाह या विद्युत आवेशित कणों के किसी निश्चित दिशा मे गति करने को विद्युत धारा कहते हैं। दोस्तो इसकी डायरेक्ट परिभाषा पड़ लेने से विद्युत धारा का पूर्ण महत्व समझ नहीं आता हैं। इसलिए हमे पहले विद्युत के बारे में भी पूरी जानकारी व सूचना होना आवश्यक है। 
विद्युत धारा क्या है What is electricity and electric current in hindi.

तो दोस्तो आज का लेख मैंने विद्युत व विद्युत धारा से पूर्णतः संबंधित है जिसमें बताया जाएगा कि ये क्या है? आखिर यह किसे कहते हैं? व परिभाषा के साथ साथ प्रकार को भी लेख में समाहित कर रहे है। तो चलिए देख लेते है कि विद्युत क्या हैं।


विद्युत क्या है? What is electricity in hindi.
विद्युत आवेशों के उपस्तिथि में अथवा बहाव से जुड़े भौतिक परिघटनाओं के समुच्चय को विद्युत कहते हैं। यानी Electricity in hindi कहा जाता हैं। अर्थात् इसे न तो देखा जा सकता है ओर न ही छुआ जा सकता है केवल इसके प्रभाव के माध्यम से इसे हमारे द्वारा महसुस ही किया जाता हैं। 
विद्युत से साधारण जीवन की आम सी घटनाएं एवं क्रियाएं जुड़ी है जैसे तडित, स्थैतिक विद्युत, विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण व विद्युत धारा है। इसके अलावा, विद्युत के द्वारा ही वैद्युत-चुम्बकीय तरंगो जैसे रेडियो तरंग का सृजन और प्राप्ति सम्भव होता है।
विद्युत धारा क्या है? किसे कहते हैं? What is electric current in hindi.
विद्युत आवेश के प्रवाह या विद्युत आवेशित कणों के किसी निश्चित दिशा मे गति करने को विद्युत धारा कहते हैं विद्युत आवेश के गति अथवा प्रवाह में होने पर उसे विद्युत धारा कहते हैं।

विद्युत धारा की S.I. इकाई एम्पीयर है। 

एक कूलांम प्रति सेकेण्ड की दर से प्रवाहित विद्युत आवेश को एक एम्पीयर धारा कहते हैं। 
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विद्युत व विद्युत धारा से संबंधित अन्य तथ्य:
विद्युत धारा क्या है What is electricity and electric current in hindi. विद्युत व विद्युत धारा से संबंधित अन्य तथ्य:

1] विद्युत के साथ चुम्बकत्व जुड़ी हुई घटना है।
2] विद्युत आवेश वैद्युतचुम्बकीय क्षेत्र पैदा करते हैं।
3] विद्युत क्षेत्र में रखे विद्युत आवेशों पर बल लगता है।
4] समस्त विद्युत का आधार इलेक्ट्रॉन हैं। क्योंकि इलेक्ट्रॉन हल्के होने के कारण ही सरलता से स्थानांतरित हो पाते हैं।
5] इलेक्ट्रानों के हस्तानान्तरण के कारण ही कोई वस्तु आवेशित होती है। 
6] आवेश की गति की दर विद्युत धारा है। 
7] विद्युत के अनेक प्रभाव हैं, जैसे चुम्बकीय क्षेत्र, ऊष्मा,  रासायनिक प्रभाव आदि।
8] जब विद्युत व चुम्बकत्व का एक साथ अध्ययन किया जाता है, तो इसे विद्युत चुम्बकत्व कहते हैं। What is electricity and electric current in hindi.
9] मात्र जिसके अनुप्रयोगों पर दुनिया की इकोनामी टिकी हुई है।
10] विद्युत को अनेकों प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है लेकिन आसान शब्दों में कहा जाये तो विद्युत आवेश की उपस्थिति और बहाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न उस सामान्य अवस्था को विद्युत कहते हैं, जिसमें अनेकों कार्यों को सम्पन्न करने की क्षमता होती है।
11] विद्युत चल या अचल इलेक्ट्रान अथवा प्रोटान से सम्बद्ध एक भौतिक घटना है। 
12] किसी चालक में विद्युत आवेशों के बहाव से उत्पन्न उर्जा को विद्युत कहते हैं।
विद्युत धारा से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी से संतुष्ट हैं तो कृपया कमेंट करके अवश्य जाएं और अपने दोस्तों को शेयर करें। जिससे उन्हें भी विद्युत धारा का ज्ञान प्राप्त ही सकें।

भौतिक विज्ञान किसे कहते हैं - what is physics in hindi

भौतिक विज्ञान किसे कहते हैं / what is physics in hindi
भौतिक विज्ञान (Physics) से संबंधित सूचना की आज का यह लेख इस से ही रिलेटेड है जिसमें आपको बताएगा कि यह क्या होती है? किसे कहते हैं? एवं विज्ञान की एक सटीक परिभाषा भी एवं इससे संबंधित विषय को भी बताया हैं।
भौतिक विज्ञान किसे कहते हैं - what is physics in hindi

आपको बता दे की भौतिक विज्ञान (Physics), विज्ञान की शाखाओं में से एक शाखा है। जिसके संबंध में लेख में बहुत सारी सूचना इंफॉर्मेशन लेके आए हैं। लेकिन भौतिक विज्ञान के बारे में जानकारी बताने से पहले विज्ञान के बारे में जानना जरूरी है इसलिए पहले हम विज्ञान किसे कहते हैं एक बारे पड़ लेते हैं।

विज्ञान किसे कहते हैं
प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के क्रमबद्ध अध्ययन करके उनका ज्ञान प्राप्त करना और उस ज्ञान के आधार पर वस्तु की प्रकृति एवं व्यवहार जैसे ही अन्य गुणों का पता लगाने को ही विज्ञान (science) कहते है।

भौतिक विज्ञान (Physics) किसे कहते हैं?
भौतिक विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा जिसमें पदार्थ के भौतिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। एवं प्रकृति में उपस्थित विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं का अध्ययन भी सुव्यवस्थित रूप से किया जाता हैं। what is physics in hindi
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  4. जीव विज्ञान किसे कहते हैं
आपके एक बात और बता दे की जब भी आप विज्ञान शब्द सुनते है, तो सबसे पहले आपको सिर्फ ये बाते ही याद आती है जैसे कुछ महान वैज्ञानिको के नाम जैसे अल्बर्ट आइन्स्टाइन, या विज्ञान के द्वारा निजात किये गए विभिन्न प्रकार के उपकरण जैसे सूक्ष्मदर्शी, तापमापी अथवा विज्ञान की कुछ अद्भुत शाखाएं जैसे अन्तरिक्ष से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा, तारे, सूर्य , पृथ्वी आदि, किन्तु विज्ञान केवल किसी एक विशेष ब्रांच अथवा उपकरण का नाम नहीं है , बल्कि विज्ञान बहुत ही अधिक विकसित है जिसे केवल किसी परिभाषा या किसी शब्द से नही बताया जा सकता है।

भौतिक विज्ञान विभिन्न विषयो पर कार्य करता है। जैसे प्रकाश , यान्त्रिकी , ऊष्मा , ध्वनी , बिजली , चुम्बकत्व आदि। इन सभी विषयों पर भौतिक विज्ञान में विस्तार से अध्ययन किया जाता है। 
भौतिक विज्ञान (Physics) के मुख्य टॉपिक या अध्याय

आइए अब भौतिक विज्ञान में अध्ययन किए जाने वाले कुछ विशेष यूनिट्स या टॉपिक्स का नाम देखते है।

भौतिक विज्ञान (Physics) के मुख्य टॉपिक या अध्याय
वैसे तो भौतिक विज्ञान (Physics) के बहुत सारे अध्याय एवं टॉपिक्स उपलब्ध है और इनसे अलग अलग अध्ययन किया जाता है। फिर भी कुछ मुख्य अध्याय को लिस्ट रूप में लिंक किया गया है। 
आपको मैंने यह लेख जिसके अंदर भौतिक विज्ञान के सभी मुख्य तथ्य एवं सही परिभाषा के साथ समझाया आपको बस अब एक कमेंट एवं इस लेख को शेयर करना है। ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए अन्य लेख अवश्य पड़े जो नीचे दिए गए है या इस लेख के मध्य लिंक किए गए हैं।

विज्ञान किसे कहते हैं परिभाषा - what is the science in hindi

विज्ञान किसे कहते हैं परिभाषा / what is the science in hindi
विज्ञान (science) से संबंधित सूचना की इंटरनेट पर आज कल हर कोई मोबाइल या कम्प्यूटर में खोजते रहते है यह मोबाइल ओर कम्प्यूटर विज्ञान की ही देन है। आज का यह लेख इस से ही रिलेटेड है जिसमें आपको बताएगा कि यह क्या होती है? किसे कहते हैं? एवं विज्ञान की एक सटीक परिभाषा भी एवं इससे संबंधित विषय को भी बताया हैं। 
विज्ञान किसे कहते हैं परिभाषा
विज्ञान किसे कहते हैं परिभाषा

विज्ञान किसे कहते हैं परिभाषा

विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान अथवा विद्या है, जो विचार, अवलोकन, अध्ययन एवं प्रयोग से मिलती है। जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति अथवा सिद्धान्तों को जानने के लिये प्रयोगों को लिए जाने की पद्धति हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी विशेष शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त एवं तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित एवं व्यवस्थित करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि "किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त विधा ही विज्ञान कहते है।" ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के "ज्ञान-भण्डार" के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान (science) की असली कसौटी है। या फिर प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के क्रमबध्द अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करने को ही विज्ञान कहते हैं। अथवा किसी भी वस्तु के बारे में विस्तृत ज्ञान को ही विज्ञान कहते हैं।

आपको अब इसकी एक परिभाषा देते है:
विज्ञान की परिभाषा
"प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के क्रमबद्ध अध्ययन करके उनका ज्ञान प्राप्त करना और उस ज्ञान के आधार पर वस्तु की प्रकृति एवं व्यवहार जैसे ही अन्य गुणों का पता लगाने को ही विज्ञान (science) कहते है। “

विज्ञान का शाब्दिक अर्थ :- वस्तुओं के व्यवस्थित ज्ञान को ही विज्ञान कहा जाता है। 

विज्ञान शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Skientia से हुई है। जिसका अर्थ है :— ज्ञान अथवा जानना। अत: हम कह सकते है, कि विज्ञान नैसर्गिक घटनाओं एवं उनके सम्बन्धों विषय में परीक्षण तथा पर्यवेक्षण से प्राप्त श्रृंखलाबद्ध ज्ञान है।

किसी भी वस्तु के बारे में जानकारी ग्रहण करना एवं जानकारी को सही तरीकों से लागू करना एवं किसी भी वस्तु का सही अवलोकन करना एवं उसका विश्लेषण करना ही विज्ञान (science) हैं।
यह भी पढ़ें

विज्ञान की शाखाएँ
विज्ञान की बहुत सारी शाखाएं है इनमें से मुख्य के नाम नीचे दे रहे है आप इनके बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते। इनके नाम पर क्लिक करे और सभी शाखाओं के बारे जाने।
1] भौतिक विज्ञान
2] रसायन विज्ञान
3] जीव विज्ञान

इसके अलावा बहुत सारी शाखाओं के नाम एवं उनके अंदर अध्ययन किस विषय पर या क्या क्या अध्ययन किए जाते है नीचे क्रमिक रूप से बता रहे है। हैं आपको बता दे की यदि आप किसी सरकारी जॉब की तैयारी कर रहे है या जॉब चाहते है तो उसके पेपर में विज्ञान के प्रश्नों में इन सभी शाखाओं से संबंधित प्रश्नों को कई बार पूछा जा चुका है और आगे भी बहुत बार परीक्षाओं में शामिल किए जाने की संभावना रहता है इसलिए अवश्य पढ़ें।
विज्ञान की प्रमुख शाखाएँ एवं अध्ययन

विज्ञान की प्रमुख शाखाएँ एवं अध्ययन
शाखा का नाम               अध्ययन
1] अंतरिक्ष विज्ञान:— अंतरिक्ष यात्रा एवं संबंधित विषय
2] मत्स्यविज्ञान:— मछलियां एवं संबंधित विषय
3] अस्थि विज्ञान (आस्टियोलॉजी):— अथियों (हड्डियों) का अध्ययन
4] इक्क्राइनोलॉजी:— गुप्त सूचनाएं एवं संबंधित विषय
5] शरीर-रचना विज्ञान (एनाटॉमी):— मानव-शरीर की संरचना
6] एयरोनॉटिक्स:— विमानों की उड़ान
7] पक्षीविज्ञान (आर्निन्थोलॉजी):— पक्षियों से संबंधित विषय
8] प्रकाशिकी (ऑप्टिक्स):— प्रकाश का गुण एवं उसकी संरचना
9] परिस्थिति विज्ञान(इकोलॉजी):— परिस्थितिकी का अध्ययन
10] खगोलिकी (एस्ट्रोनॉमी):— तारों एवं ग्रहों से संबंधित विषय तथा आकाशीय पिंडों का अध्ययन
11] एग्रोलॉजी:— भूमि (मिट्‌टी) का अध्ययन
12] कीटविज्ञान (एंटोमोलॉजी):— कीट एवं संबंधित विषय
13] स्त्री-रोग विज्ञान:—  मादाओं के प्रजनन अंगों का अध्ययन
14] भूविज्ञान:—  पृथ्वी की आंतरिक्ष संरचनारत्न विज्ञानरत्नों का अध्ययन
15] विरूपताविज्ञान (टेराटोलॉजी):— ट्‌यूमर का अध्ययन
16] टैक्टोलॉजीपशु :— शरीर का रचनात्मक संघटन
17] एरेक्नोलॉजी:— मकड़े एवं संबंधित विषय
18] भ्रूणविज्ञान (एम्ब्रायोलॉजी):— भ्रण एवं संबंधित विषय
19] समुद्र विज्ञान:— समुद्र से संबंधित विषय
20] ब्रह्माण्डविद्या:— ब्रम्हांड का अध्ययन
21] बीज-लेखन:—  गुप्त लेखन अथवा गूढ लिपि
22] त्वचाविज्ञान (डर्मेटोलॉजी):— त्वचा एवं संबंधित रोगों का अध्ययन
23] डेन्ड्रोलॉजी:— वृक्षों का अध्ययन 
24] डेक्टाइलॉजी:— अंकों (संख्याओ) का अध्ययन
25] तंत्रिकाविज्ञान (न्यूरोलॉजी):— नाड़ी स्पंदन एवं संबंधित विषय
26] मुद्राविज्ञान (न्यूमिसमेटिक्स):— मुद्रा – निर्माण एवं अंकन
27] बैलनियोलॉजी:— खनिज निष्कासन एवं संबंधित विषय
28] जीवविज्ञान (बायलॉजी):— जीवधारियों का शारीरिक अध्ययन
29] वनस्पति विज्ञान:— पौधों का अध्ययन
30] जीवाणु-विज्ञान (बैक्टीरियोलॉजी):— जीवाणुओं से संबंधित विषय
यह भी पढ़ें
  1. विज्ञान किसे कहते हैं
  2. भौतिक विज्ञान किसे कहते हैं
  3. रसायन विज्ञान किसे कहते हैं
  4. जीव विज्ञान किसे कहते हैं
31] मारफोलॉजी:— जीव एवं भौतिक जगत्‌ की आकारिकी का अध्ययन
32] रोगविज्ञान (पैथोलॉजी):—  रोगों के कारण एवं संबंधित विषय
33] जीवाशिमकी (पैलिओंटोलॉजी):— जीवाश्म एवं संबंधित विषय
34] परजीवीविज्ञान (पैरासाइटोलॉजी):— परजीवी वनस्पतियां एवं जीवाणु
35] विकिरणजैविकी (रेडियोबायोलॉजी):—  जीव-जंतुओं पर सौर विकिरण का प्रभाव
36] शैल लक्षण (लिथोलॉजी):— चट्टानों एवं पत्थरों से संबंधित विषय
37] लिम्नोलॉजी:— झीलों एवं स्थलीय जल भागों का अध्ययन
38] सीरमविज्ञान (सीरोलॉजी):— रक्त सीरम एवं रक्त आधान से संबंधित
39] स्पलैक्नोलॉजी:— शरीर के आंतरिक अंग एवं संबंधित
40] फायनोलॉजी:— जीव-जन्तुओं का जातीय विकास
41] ब्रायोफाइटा-विज्ञान (ब्रायोलॉजी):— दलदल एवं कीचड़ का अध्ययन
42] खनिजविज्ञान (मिनेरालॉजी):— खनिजों का अध्ययन
43] मौसम विज्ञान (मेटेरोलॉजी):— वातावरण एवं संबंधित विषय
44] माइक्रोलॉजी:— फफूंद एवं संबंधित विषय
45] मायोलॉजी:— मांस-पेशियों का अध्ययन
46] अंतरिक्ष जीवविज्ञान (स्पेस बायलोजी):— पृथ्वी से परे अंतरिक्ष में जीवन की सम्भावना का अध्ययन
47]रुधिरविज्ञान(हीमेटोलॉजी):— रक्त एवं संबंधित विषयों का अध्ययन
48]हेलियोलॉजी:— सूर्य का अध्ययन
49]उभयसृपविज्ञान (हरपेटोलॉजी):— सरीसृपों का अध्ययन
50]ऊतकविज्ञान (हिस्टोलॉजी):—शरीर के ऊतक एवं संबंधित विषय
51]हिप्नोलॉजी:— निद्रा एवं संबंधित विषयों का अध्ययन
आज के इस लेख ने अंदर मैंने विज्ञान किसे कहते हैं क्या है व इसकी परिभाषा के साथ साथ इसकी शाखाओं के नामों की बताया यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें नीचे कमेंट करके अवश्य बताए।

ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of conservation of Energy)

ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of conservation of Energy)

दोस्तो आज का यह लेख ऊर्जा संरक्षण का नियम यानी की Law of conservation of Energy से संबंधित रिलेटेड जानकारी की हिंदी में आपके सामने बहुत ही सरल शब्दों में लिखे आया हूं। यह आपको बहुत ही सरलता से समझ आ सकता है यदि आप इस एक बार ध्यान से पूरा पड़ लेते है। urja sanrakshan ka niya 
ऊर्जा संरक्षण का नियम
ऊर्जा संरक्षण का नियम

ऊर्जा के संरक्षण का नियम

यह नियम भौतिकी का एक प्रयोग पर आधारित एक प्रकार का नियम है।

ऊर्जा के संरक्षण के नियम के अनुसार "ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न हीं नष्ट की जा सकती है। और जो केवल एक रुप से दूसरे रूप में परिवर्तित (बदली) की जा सकती है। जब भी ऊर्जा किसी रूप में लुप्त होती है तब ठीक उतनी ही ऊर्जा किसी अन्य रूपों में प्रकट होती है। अत: विश्व की संपूर्ण ऊर्जा का  परिणाम या परिणामी स्थिर है, यह ऊर्जा संरक्षण का नियम कहलाता है।"

उष्मागतिकी का प्रथम नियम को भी वास्तव में ऊर्जा के संरक्षण के नियम का एक परिवर्तित या रूपांतरित रूप है।

दोस्तो मैंने पहले इसके सिद्धांत के बारे में मैंने बताया अब में आपको बताता ही ऊर्जा के संरक्षण का नियम को कब और किसने दिया


ऊर्जा संरक्षण का नियम किसने दिया

ऊर्जा संरक्षण का नियम के प्रतिपादन 1841 में जूलियस रॉबर्ट मेयर ने ऊर्जा संरक्षण के लिए सबसे पहले अपना सिद्धांत दिया। और इस नियम के संबंधित जानकारी को विस्तार से बताया, इसलिए जूलियस रॉबर्ट मेयर को ऊर्जा संरक्षण का जनक कहा जाता है। यानी की ऊर्जा संरक्षण का नियम किसने और कब दिया यह आपको अच्छे से पता चल गया होगा।
    जूलियस रॉबर्ट मेयर ने उष्मागतिकी की खोज की और सबसे पहले अपने ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम में यह बताया था।

ऊर्जा रुपांतरित करने वाले कुछ उपकरण नीचे दिए गए हैं
1) डाइनेमो  :—यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
2) मोमबत्ती:— रासायनिक ऊर्जा को प्रकाश एवं उष्मा ऊर्जा में
3) माइक्रोफोन:— ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
4) लाउडस्पीकर:— विद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
5) सोलर सेल:— सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
6) ट्यूब लाइट:— विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में
7) विद्युत सेल:— रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
8) विद्युत मोटर:— विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में
9) सितार यांत्रिक:— ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में

ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of conservation of Energy) का यह लेख या पोस्ट आपको कैसी लगी आप कमेंट करके अवश्य बताए। और अन्य दोस्तो को शेयर करें । ताकि उन्हें भी जानकारी मिल सके।

आवृत्ति और आवेग (Frequency and impulse)

आवृत्ति और आवेग (Frequency and impulse)
आवृत्ति और आवेग दोनों को ही सरलता पूर्वक नीचे बताए हैं। आपको यह जानकारी अवश्य ही अच्छी लगेगी।
आवृत्ति (frequency)
कोई आवृत घटना (बार - बार दोहराई जाने वाली घटना), इकाई समय में जितनी बार घटित होती है, उस प्रकार की घटना को आवृत्ति (frequency) कहते हैं। आवृति को किसी साइनाकार तरंग के कला परिवर्तन की rate के रूप में भी समझा जा सकता हैं । 

आवृति की इकाई हर्त्ज (साकल्स प्रति सेकण्ड) होती है।

एक कम्पन पूरा करने में जितना समय लगता है, उसे आवर्त काल कहते हैं ।

आवर्त काल = 1 / आवृति
अर्थात, T = 1 / f
{** यह भी पढ़ें **}

  1. कार्य ऊर्जा और शक्ति 
  2. गुरुतवाकर्षण बल
  3. कोणीय वेग और रेखीय वेग
  4. अपकेन्द्रीय बल और अभिकेंद्रीय बल
  5. सदिश राशि और अदिश राशि
  6. त्वरण, वेग और चाल
  7. चालक, कुचालक और अर्द्धचालक


आवेग
बल और समय के अंतराल के गुणनफल को बल का आवेग कहते हैं ।

यदि किसी पिंड पर एक नियम बल F को डेल्टा t समय के अंतराल के लिए लगाया जाये , तो उस बल का आवेग F * डेल्टा t होगा । 

आवेग एक सदिश राशि है। 
इसकी दशा वही होगी जो बल की है।

माना कि किसी पिण्ड का द्रव्यमान m है। इस पर नियम बल F को डेल्टा t समय के अंतराल के लिए लगाए गए वेग में डेल्टा v परिवर्तन होता है। 

तब न्यूटन के नियमानुसार-

F = m*a = m * डेल्टा v / डेल्टा t

F डेल्टा t = m डेल्टा t

अब  m डेल्टा v = डेल्टा p
इसलिए  F डेल्टा t = डेल्टा p

अतः किसी पिंड को दिया गया आवेग , पिंड में उत्पन्न संवेग परिवर्तन के बराबर होता है । 

अतः आवेग का मात्रक भी वही होता है जो संवेग (न्यूटन.सेकेण्ड) का है।

आवृत्ति और आवेग से रिलेटेड यह आर्टिकल आपको कैसा लगा आप अन्य लेख भी यहां से पद सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए हमारा मुख्य पृष्ठ पर जाएं या फिर नीचे की टॉपिक से भी आप अपना किसी जानकारी को पड़ सकते हैं।
{** यह भी पढ़ें **}

  1. कार्य ऊर्जा और शक्ति 
  2. गुरुतवाकर्षण बल
  3. कोणीय वेग और रेखीय वेग
  4. अपकेन्द्रीय बल और अभिकेंद्रीय बल
  5. सदिश राशि और अदिश राशि
  6. त्वरण, वेग और चाल
  7. चालक, कुचालक और अर्द्धचालक
  8. ससंजन और आसंजन क्या है