परासरण और परासरण दाब क्या है । परिभाषा । उदाहरण । सूत्र । महत्व । परासरण की खोज किसने की

परासरण और परासरण दाब क्या है। परिभाषा, उदाहरण, सूत्र, महत्व, परासरण की खोज किसने की

में आपको इसमें परासरण दाब क्या है के बारे में बताने जा रहा हूं इसमें परासरण दाब किसे कहते है।इसकी परिभाषा भी बताने वाला हूं।
परासरण और परासरण दाब क्या है । परिभाषा । उदाहरण

परासरण दाब क्या है

परासरण दाब परासरण को रोकने के लिए लगाया जाता है।

परासरण दाब पैदा होता है। जो परासरण को रोकने के लिए लगाया जाता है अर्थात परासरण के विरुद्ध कोई बाय बल कार्य करता है वह बल परासरण दाब कहलाता है।
या
परासरण को रोकने के लिये आवश्यक वाह्य दाब की मात्रा को परासरण दाब कहते हैं।

किसी विलयन को एक अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा आसुत जल से अलग रखा जाय तो यहाँ जितना अधिकतम दाब उत्पन्न हो सकता है। उसे शक्य परासरण दाब कहते हैं। परासरण की परिघटना जीवविज्ञान में अति महत्वपूर्ण है क्योंकि कोशिका भित्ति भी अर्धपारगम्य होती है।
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परासरण क्या है 

कम सांद्रण वाले घोल से अधिक सान्द्रण वाले घोल की तरफ विलायक के अणुओं की गति को परासरण कहते है।इसमें विलियन का स्तर अलग अलग हो जाता है।

परासरण किसी विशेष प्रकार के दो घोलो के बीच होने वाली एक विसरण की प्रक्रिया है जो कि एक अर्ध पारगामी झिल्ली के द्वारा संचालित की जाती है

इसमें विलायक के अणु कम सान्द्रता वाले घोल से अधिक सान्द्रता वाले घोल का ओर गति करते हैं।

परासरण की क्रिया एक प्रकार की भौतिक क्रिया होती है जिसमें घोलक के अणु बिना किसी बाह्य उर्जा के प्रयोग के अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर गति करते हैं।

इसमें विलेय के अणु गति नहीं करते हैं क्योंकि वे दोनों घोलों के अलग करने वाली अर्धपारगम्य झिल्ली को पार कर पाने में असमर्थ रहते है।

परासरण में एक विशेष प्रकार की उर्जा मुक्त होती है जिसके प्रयोग से पेड़-पौधों के बढते जड़ में इतनी शक्ति के कारण चट्टानों को भी तोड़ देती हैं।
या
परासरण की क्रिया में वह क्रिया जिसके परिणास्वरूप अर्धपरागम्य झिल्ली से होकर विलायक के अणु कम सांद्रता वाले घोल से अधिक सांद्रता की ओर जाते है परासरण क्रिया कहलाती है।

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परासरण दाब क्या है कि सभी प्रकार की जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है यदि आपको यह पोस्ट परासरण अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट करें ताकि हमें अपने मार्गदर्शन प्राप्त हो जाती हम ऐसी ही और पोस्ट लिख सके।

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